हुस्न ढल जाए तब आना
उसने कहा तुम सिर्फ मेरे हुस्न के दीवाने हो।
जवाब…
हुस्न ढल जाए, तब आना,
बहार निकल जाए, तब आना,
मौसम बदल जाए, तब आना,
सबकुछ बदल जाए, तब आना।
अरे मेरे सपनों के सौदागर..
जब उम्मीदों का दरिया सुख कर,
रेगिस्तान बन जाए, तब आना,
इन आंखों में रोके हुए आंसुओं से,
जब दरिया में बाढ़ आ जाए, तब आना
सबकुछ खत्म हो जाए जब, तब आना
यहीं मिलूंगा,
तुम्हारे इंतजार में,
राह में पलके बिछाए,
मिलन के सपने सजाए।
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